इंदौर (मध्य प्रदेश)। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) की स्कूल ऑफ बायोकेमिस्ट्री की वैज्ञानिक डॉ. सुनीता कटारिया ने एक बार फिर बड़ा सम्मान हासिल किया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर द्वारा जारी “विश्व के टॉप 2% वैज्ञानिकों की सूची 2024-2025” में उन्हें जगह मिली है।
DAVV की तीसरी फैकल्टी मेंबर बनीं टॉप 2% में
डॉ. सुनीता कटारिया DAVV की तीसरी फैकल्टी मेंबर हैं जो इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हुई हैं। यह सम्मान उन्हें लगातार दूसरा साल मिला है, जो उनके निरंतर शानदार शोध कार्य का प्रमाण है।
पहले इस साल प्रो. अंजना जाजू और डॉ. मुकेश शर्मा को भी यही सम्मान मिल चुका है।
बेस्ट रिसर्च पेपर अवॉर्ड भी मिला
डॉ. कटारिया का शोध पत्र “सोयाबीन में उच्च तापमान और जल की कमी का नाइट्रोजन फिक्सेशन, फोटोसिंथेसिस और बीज की गुणवत्ता पर प्रभाव” को साल 2024 का जीएस सिरोही बेस्ट रिसर्च पेपर अवॉर्ड मिला है।
यह पेपर प्लांट फिजियोलॉजी रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुआ था। अवॉर्ड 15 दिसंबर को कोयंबटूर में तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (TNAU) में होने वाले 6ठे इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन प्लांट फिजियोलॉजी (ICPP 2025) के उद्घाटन सत्र में दिया जाएगा।
24 साल से फसलों को पर्यावरणीय तनाव से बचा रही हैं
प्लांट फिजियोलॉजिस्ट डॉ. सुनीता कटारिया के पास 24 साल से ज्यादा का रिसर्च अनुभव है। उनका मुख्य काम फसलों को सूखा, ज्यादा नमक (सलिनिटी) और हानिकारक UV-B किरणों से बचाने के उपाय खोजना है।
इन शोधों से किसानों को जलवायु परिवर्तन की मार से बचाने में बड़ी मदद मिल रही है।
कुलपति ने दी बधाई
DAVV के कुलपति प्रो. राकेश सिंघई ने डॉ. कटारिया को बधाई देते हुए कहा, “यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। डॉ. कटारिया का काम पूरे देश के लिए प्रेरणा है।”
क्यों खास है यह उपलब्धि?
- स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की टॉप 2% सूची दुनिया भर के लाखों वैज्ञानिकों के साइटेशन, प्रभाव और शोध गुणवत्ता के आधार पर बनाई जाती है।
- लगातार दो साल शामिल होना बहुत बड़ी बात है।
- DAVV अब मध्य भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में शोध के मामले में मजबूत दावेदारी दिखा रहा है।
इंदौर और मध्य प्रदेश के लिए यह उपलब्धि गर्व करने वाली है। डॉ. सुनीता कटारिया जैसे वैज्ञानिक भारत को कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में आगे ले जा रहे हैं।
