खराब CBIL स्कोर ने छीनी बैंक की नौकरी! मद्रास HC का बड़ा फैसला!

चेन्नई, 8 जुलाई 2025: मद्रास हाई कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा एक उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। कारण? उम्मीदवार का खराब क्रेडिट इतिहास

कोर्ट ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है, और खराब क्रेडिट रिकॉर्ड वाले व्यक्ति पर सार्वजनिक धन की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जा सकती।

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कोर्ट का फैसला: वित्तीय अनुशासन जरूरी

जस्टिस एन. माला ने अपने फैसले में कहा, बैंकिंग व्यवसाय में कर्मचारी सार्वजनिक धन से निपटते हैं, इसलिए वित्तीय अनुशासन का सख्ती से पालन करना जरूरी है।

सार्वजनिक धन को संभालने में दक्षता होनी चाहिए, और स्पष्ट रूप से खराब वित्तीय अनुशासन वाला व्यक्ति इस जिम्मेदारी के लिए भरोसेमंद नहीं हो सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि SBI का वह नियम उचित है, जिसमें लोन डिफॉल्ट या नकारात्मक CIBIL रिपोर्ट वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति के लिए अयोग्य माना जाता है।

क्या था मामला?

याचिकाकर्ता ने SBI में सर्कल बेस्ड ऑफिसर (CBO) के पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और मेडिकल टेस्ट सहित सभी चरणों को सफलतापूर्वक पास किया।

16 मार्च 2021 को उन्हें नियुक्ति पत्र भी जारी किया गया। लेकिन, उनकी CIBIL रिपोर्ट में खामियां पाए जाने के बाद उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई।

SBI ने बताया कि याचिकाकर्ता की CIBIL रिपोर्ट 12 मार्च को ली गई और 16 मार्च को सत्यापित की गई। इसमें अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया।

हालांकि, याचिकाकर्ता के जवाब के बावजूद, उनकी नियुक्ति को पात्रता मानदंड के क्लॉज 1(E) के आधार पर रद्द कर दिया गया, जो क्रेडिटवर्थनेस से संबंधित है।

याचिकाकर्ता का दावा

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दावा किया कि जब नौकरी के लिए अधिसूचना जारी हुई थी, तब उनके पास कोई बकाया लोन या डिफॉल्ट नहीं था।

उन्होंने कहा कि उनके सभी लोन चुकाए गए थे और किसी भी एजेंसी ने उन्हें डिफॉल्टर के रूप में चिह्नित नहीं किया था। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समान क्रेडिट समस्याओं वाले अन्य उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई, जिससे उनके साथ भेदभाव हुआ।

SBI का जवाब: नियम स्पष्ट, डिफॉल्ट की जानकारी छिपाई

SBI ने जवाब में कहा कि उनके नियम स्पष्ट हैं कि खराब क्रेडिट इतिहास या नकारात्मक CIBIL रिपोर्ट वाले उम्मीदवार नौकरी के लिए पात्र नहीं हैं।

बैंक ने याचिकाकर्ता पर लोन डिफॉल्ट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। बैंक ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता ने एक से अधिक लोन पर भुगतान चूक किया था।

कोर्ट का अंतिम फैसला

मद्रास हाई कोर्ट ने CIBIL रिपोर्ट की जांच की और पाया कि याचिकाकर्ता के नाम पर नौ अनियमित क्रेडिट सुविधाएं और 10 से अधिक क्रेडिट पूछताछ दर्ज थीं।

याचिकाकर्ता ने खुद भी लोन डिफॉल्ट की बात स्वीकारी थी। कोर्ट ने कहा, बैंक ने यह समझदारी भरा फैसला लिया कि लोन चुकाने में डिफॉल्ट और नकारात्मक CIBIL रिपोर्ट वाले उम्मीदवार नियुक्ति के लिए अयोग्य हैं।

भेदभाव का दावा खारिज

याचिकाकर्ता के भेदभाव के दावे को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल वही उम्मीदवार नियुक्त किए गए, जिन्होंने सभी पात्रता मानदंडों को पूरा किया था।

चूंकि याचिकाकर्ता ने डिफॉल्ट किया था और इसे स्वीकार भी किया था, इसलिए उनकी याचिका में कोई आधार नहीं था।

निष्कर्ष

मद्रास हाई कोर्ट ने SBI के फैसले को उचित ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। यह मामला उन उम्मीदवारों के लिए एक सबक है जो बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे हैं।

वित्तीय अनुशासन और साफ क्रेडिट इतिहास न केवल नौकरी पाने के लिए, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में विश्वास बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।

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