भोपाल के नीलम पार्क में इन दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जो मध्य प्रदेश के युवाओं की हताशा को पूरी तरह बयां कर रहा है। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। कई महिलाएं बच्चों के साथ रात बिता रही हैं। एक अभ्यर्थी पानी तक छोड़कर भूख हड़ताल पर है। उनका एक साफ संदेश है — “हमें सरकारी सहायता के 1500 रुपये नहीं चाहिए, हमें नौकरी चाहिए।”
ये अभ्यर्थी 2025 की माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती (कक्षा 2 और कक्षा 3) में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने बहुत कम पद अधिसूचित किए हैं, जबकि प्रदेश में कक्षा 3 के लगभग 25,000 पद खाली बताए जा रहे हैं। कक्षा 2 के लिए विषयवार हजारों पद बढ़ाने की मांग की जा रही है। अभ्यर्थी इसे “रक्षाबंधन का तोहफा” बताकर मुख्यमंत्री से अपील कर रहे हैं।
सिर्फ नौकरी की लड़ाई नहीं, शिक्षा की भी
इस प्रदर्शन के साथ ही “स्कूल बचाओ संघर्ष समिति” के बैनर तले भी आवाजें उठ रही हैं। लोग सरकारी स्कूलों की हालत पर सवाल उठा रहे हैं। आंकड़े चौंकाने वाले हैं — प्रदेश में शिक्षकों के लगभग 1.15 लाख पद खाली बताए गए हैं। हजारों स्कूलों में बिजली नहीं है, सैकड़ों स्कूलों में शौचालय तक नहीं हैं, कई स्कूल जर्जर इमारतों में चल रहे हैं और कुछ स्कूलों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं है। स्कूल बंद होने और विलय की शिकायतें भी जोर-शोर से उठ रही हैं।
ये दो अलग-अलग प्रदर्शन एक ही सच्चाई की ओर इशारा कर रहे हैं — मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती और सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में गहरी दरार है। एक तरफ योग्य युवा सालों से तैयारी करके बैठे हैं, दूसरी तरफ स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और बच्चे प्रभावित हो रहे हैं।
युवाओं का गुस्सा क्यों फूट रहा है?
महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि वे परिवार चलाने के लिए खुद कमाना चाहती हैं, न कि सरकारी सहायता पर निर्भर रहना। कई अभ्यर्थी लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। प्रदर्शन में भूख हड़ताल, रात भर बैठना और याददाश्त दिलाने वाले नारे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि मुद्दा सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और बच्चों की शिक्षा से जुड़ा है।
सरकार ने हाल के महीनों में सरकारी भर्तियों की रफ्तार बढ़ाई है और एक लाख नौकरियों का लक्ष्य भी घोषित किया है। लेकिन शिक्षक अभ्यर्थियों को लगता है कि उनकी मांगों पर अभी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
क्या होगा आगे?
यह प्रदर्शन सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रह सकता। मध्य प्रदेश के लाखों युवा बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था दोनों से जुड़ी खबरों पर नजर रखे हुए हैं। अगर पदों की संख्या नहीं बढ़ी, भर्ती प्रक्रिया में देरी जारी रही और स्कूलों की बदहाली दूर नहीं हुई, तो आक्रोश और फैल सकता है।
सवाल साफ है — क्या सरकार रक्षाबंधन के मौके पर युवाओं को नौकरियों का तोहफा देगी, या फिर सिर्फ सहायता राशि और आश्वासन ही मिलते रहेंगे? बच्चों के भविष्य और युवाओं की मेहनत दोनों दांव पर हैं।
यह मुद्दा सिर्फ अभ्यर्थियों का नहीं, पूरे प्रदेश का है। जितनी जल्दी इस पर संजीदगी से ध्यान दिया जाएगा, उतना ही बेहतर।